बबूल के पेड़ से वशीकरण वैसे तो बबूल का पेड़ कई प्रकार से उपयोग मे लाया जाता है। लेकिन आप बबूल के पेड़ से वशीकरण भी कर सकते हैं।बबूल के पेड़ से भूत को वश मे करने के तरीके के बारे मे हम एक लेख के अंदर विस्तार से बताएं है। बबूल के अंदर जल डालने से उसके अंदर रहने वाला प्रेत वश मे हो जाता है। इस प्रकार की सिद्वियों को तांत्रिक करना पसंद करते हैं।वे बबूल के पेड़ के प्रेत को वश मे करने के बाद उससे कई प्रकार के कार्य करवाते हैं। हालांकि यह उपयुक्त तरीका नहीं है। यह एक तामसिक ताकत होती है जो आपको नुकसान भी पहुंचा सकती है।
बबूल के पेड़ से कई प्रकार की वशीकरण साधना की जाती है।बबूल के पेड़ की मदद से इस लेख के अंदर हम विभिन्न प्रकार की वशीकरण साधना के बारे मे विस्तार से बात करने वाले हैं।
आप इस तरीके की मदद से किसी भी स्त्री या पुरूष को वश मे कर सकते हैं। यह बहुत ही उपयोगी उपाय होता है। जिसको कोई भी कर सकता है। सबसे पहले बबूल की जड़ का एक छोटा सा टुकड़ा ले आएं आप उसको तोड़ कर ला सकते हैं या काट कर भी ला सकते हैं।लेकिन आपको एक बात का ध्यान अवश्य ही रखना है कि टुकड़ा तोड़ते वक्त आपके उपर किसी की नजर नहीं पड़नी चाहिए ।
उसके बाद शनिवार के दिन स्नान करें और फिर उत्तर दिशा के अंदर बैठ कर नीचे दिया गया मंत्र जाप 108 बार करें ।आपको यह काम एकांत के अंदर ही करना है। मंत्र बोलने से पहले इस टुकड़े को गंगाजल से धोकर शुद्व कर लेना चाहिए । उसके बाद ही मंत्र जप करलेना चाहिए ।
उसके बाद इस लकड़ी के टुकड़े पर लाल धागा लपेट कर अपने हाथ के उपर बांध लेना चाहिए । अब आप आपको उस व्यक्ति के सामने जाना होता है जिसको आप वश मे करना चाहते हैं। मंत्र इस प्रकार से है।
ऊँ सुदर्शनाय हुं फट् स्वाहा
यह तरीका भी उपर दी गई विधि के समान ही है।सबसे पहले आपको ॐ सुदर्शनाय हुं फद् स्वाहा। मंत्र 3 लाख बार बोलकर सिद्व कर लेना है। यदि आप इस मंत्र की विधि के बारे मे जानना चाहते हैं तो आप किसी वशीकरण पंडित जी से संपर्क कर सकते हैं। पंड़ित जी के नंबर आपको ऑनलाइन वेबसाइट के उपर मिल जाएंगे । जब मंत्र सिद्व हो जाए तो बबूल की जड़ को मंत्रित करने के बाद अपनी भुजा के उपर बांध लेना चाहिए ।
आपको इस बात का ध्यान रखना होता है कि जड़ लाते समय आपको कोई देखे नहीं । और जड़ लाने के बाद आपको उसे गोमूत्र से शुद्व करना होता है। इसके अलावा आपको मंत्र पढ़ते समय कोई ना देखना चाहिए । जड़ केवल हस्त नक्षत्र के अंदर ही लानी चाहिए ।
सबसें पहले आपको बबूल के 3 कांटों की आवश्यकता होगी । आप किसी भी समय किसी बबूल के पेंड़ से कांटे ले आएं और इनको अपने बांए हाथ की मुठी के अंदर लें ।और दिये हुए मंत्र का 108 बार जाप करना है।आपको एक साथ तीनों कांटे पकड़े हैं । और सबसे पहले 108 बार मंत्र जप करके फूंक कांटो पर मारनी होगी । इसी प्रकार से आपको 3 बार करना होगा और तीनों ही बार मंत्र बोलना होगा । उसके बाद आपको किसी पीपल के पेड़ के नीचे जाना है। और वहां पर तीन पीपल के पतों के अंदर तीन कांटों को चुभा देना हैं। और उस पीपल के पेड़ के नीचे तिल का दिया जलादें ।
ओम मुक्तिप्रदानाय अकालम्रत्यू:परिरक्षणर्थं
वंदे महाकाल महासुरेशम वशियम भवंति ।।
और इस मंत्र के बीच मे उस व्यक्ति का नाम लेना है। जिसको आप वंश मे करना चाहते हैं।
दोस्तों सबसे पहले किसी बबलू के पास पहले दिन जाना है। और आपको प्रार्थना करनी है कि हे बबूल की लकड़ी मैं आपको कल लेने आउंगा ।उसके बाद दूसरे दिन जाएं और उस बबलू की छोटी सी लकड़ी को काट लाएं ।उसके बाद उसकी घर के अंदर पूजा करें ।
इस लकड़ी को मदार के पत्ते के अंदर लपेट लेंवे फिर आपको सात बार बांधना है इसको रक्षा सूत्र से बांधदें । अब आपको एक कागज लेना हैं और उसके उपर अपनी इच्छा को लिख देना होगा ।
उसके बाद किसी पिपल के पुराने पेड़ के पास जाना है और उन सबको उस की जड़ या कहीं पर बांध देना है।और पीपल से प्रार्थना करनी है कि आप उनकी मनोकामना को पूर्ण करें । जब आपकी मनोकामना पूर्ण हो जाए तो एक जग दूध ले जाकर पीपल के जड़ मे डालदें ।
यदि आप चावल डालेंगे तो और भी अच्छा होगा ।उसके बाद सब चीजों को खोलना है और किसी बहते पानी के अंदर बहा देना होगा ।
शनिवार के दिन कनिष्ठा नक्षत्र को बबूल की जड़ को घर ले आएं और उसको पीस कर चूर्ण बनालें और सुबह आप जहां पर भी जाएं । और उस चूर्ण को किसी के भी सर मे डालेंगे वो आपके वश मे हो जाएगा । यह बहुत ही सिंपल प्रयोग है और इसका प्रयोग कोई भी कर सकता है।
किसी भी शुक्रवार के दिन जल ,अक्षत और अगरबती लेकर किसी बबूल के पेड़ के पास जाएं और उसकी पूजा करके उसको निमंत्रण देकर आएं ।उसके बाद शनिवार के दिन प्रात काल सूर्य उदय से पूर्व घास काटने वाले औजार को लेकर बबूल की जड़ काट लाएं । और उसके बाद इस जड़ को गूगल की धूनी दें और यह सिद्व हो जाएगी और उसके बाद आप इस जड़ का चूर्ण बनाकर जिसके भी सर के उपर डालेंगे तो वह वश मे हो जाएगा ।
यह एक प्रभावी वशीकरण है। इसके लिए आपको कुछ इत्र ,बबूल की जड़ और कैसरी रंग चाहिए होता है। आप इसका प्रयोग दिन के अंदर भी कर सकते हैं। सबसे पहले किसी दिन बबूल की जड़ को काट लावें और उसके बाद केसरी रंग के अंदर इत्र मिलालें और नीचे दिये हुए मंत्र का 108 बार जाप करना है। मंत्र को जाप करते हुए जड़ को पात्र मे डूबोना है।इसको पीस करके अपने गले के अंदर डाललें । कुछ दिन बाद आपको परिणाम मिलेगा । इसको किसी को बताएं ना ।
क्ष्री क्ष्री हूं हूं क्ष्री क्ष्री कामाख्या प्रसिद्व स्त्री स्त्री हूं हूं क्ष्री क्ष्री स्वाहा
यह उपाय बहुत ही सरल है। इसमे आपको अपनी प्रेमिका का कोई वस्त्र हाशिल करना होता है। यह उपाय हर किसी के उपर काम नहीं करेगा । वस्त्र हाशिल करनें के बाद अपनी प्रेमिका का स्मरण करके सो जाएं । वस्त्र को अपने पास रखें । और सूर्यादय से पहले जाग कर नहालें और कपड़े पहनकर उस वस्त्र की एक पोटली बनाकर उस बबूल के पेड़ के नीचे जाएं जो किसी निर्जर स्थान पर हो ।
उसके बाद उसकी जड़ों के अंदर फावड़े से एक गहरा गढ़ा खोदे आपको यह करते हुए कोई देखना नहीं चाहिए ।
उसके बाद वहां पर उस पोटली को बुर दें । उसके उपर एक पत्थर रखदें और वहां पर 5 दिन तक घी का दीपक जलाएं । जल्दी ही आपकी प्रेंमिका आपके वश मे हो जाएगी ।
सबसे पहले अपनी प्रेमिका की एक बिंदिया को लाएं ।और एक बबूल का गोंद लाएं । इन दोनों के अंदर अपना थोड़ा सा शुक्राणु लगादेंवें । उसके बाद अंधेरे के अंदर माता काली की एक मूर्ति स्थापित करें और उसके आगे गाड़ देंवे ।और उसके बाद वहीं पर बैठ कर नीचे दिया हुआ मंत्र 1200 बार जप करें । और फिर उस बिंदिया को निकालदें ।और उस स्त्री को किसी बंदियां की पत्ते के साथ वापस भेंट करदें । मंत्र इस प्रकार है।
ओम नमः कालिकाय कालरूप रक्त बीज नाशिनी मम कामना पूर्ती कुरू कुरू स्वाहा।
बबूल के पेड़ का 21 दिन का टोटका कैसे किया जाता है ?
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बबूल के पेड़ से वशीकरण के टोटकों को आपने उपर जाना कोई भी टोटका बिना गुरू के ना करें । इनको मात्र एक जानकारी समझें । और यदि इनके प्रयोंग से किसी को कोई हानि होती है तो उसके लिए वह खुद जिम्मेदार होगा ।
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