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Chatur ka vilom shabd चतुर का विलोम शब्द क्या है ?

चतुर का विलोम शब्द, चतुर शब्द का विपरीतार्थक शब्द है, चतुर का उल्टा Chatur ka vilom shabd

शब्द (word) विलोम (vilom)
चतुरमूढ़, मूर्ख
ChaturMudh, Murkh
Clever Idiot

‌‌‌चतुर का विलोम शब्द और अर्थ

चतुर का मतलब होता है जो चालाक होता है। अक्सर आपने चतुराई के बारे मे सुना होगा ।वैसे चतुराई को स्मार्टनेस भी कह सकते हैं। चतुराई का प्रयोग आप कई तरीके से कर सकते हैं। यदि आप कुछ ऐसी ट्रिक आती हैं कि दूसरों को वैसा नहीं आता है तो आप चतुर होंगे। एक चोर ताला खोलने मे ‌‌‌काफी चतुर होता है क्योंकि वह इसी प्रकार का काम करता है। सिर्फ इतना ही नहीं यदि आप उसे ताला खोलने को कहेंगे तो वह इतनी सफाई से ताले को खोल देगा कि आपको पता ही नहीं चलेगा ।

‌‌‌इसी प्रकार से आपने जेबकतरे का नाम तो सुना ही होगा ।अक्सर जेबकतरे जेब काटने मे इतने चतुर होते हैं कि आपको पता ही नहीं चलेगा कि जेब कट गई। और जब आपको पता चलेगा तो फिर बहुत देर हो चुकी होगी ।

चतुर का विलोम शब्दचतुर का विलोम शब्द

‌‌‌इसी प्रकार से कुछ लोग अच्छे कार्यों को करने मे भी चतुर होते हैं।जब चतुराई का नाम आता है तो चाणक्य का नाम आए बिना कैसे रह सकता है। चाणक्य को चतुराई का जनक माना जाता है।वे चन्द्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे। वे कौटिल्य या विष्णुगुप्त नाम से भी विख्यात हैं। वे तक्षशिला विश्वविद्यालय के आचार्य थे । ‌‌‌चाणक्य एक महा ज्ञानी इंसान थे । जिन्होंने अपनी चतुराई से आचार्य ने यह प्रतिज्ञा की कि जब तक मैं नंदों का नाश न कर लूँगा तब तक अपनी शिखा नहीं ‌‌‌बांधूंगा । उन्हीं दिनों राजकुमार चंद्रगुप्त राज्य से निकाले गए थे। चंद्रगुप्त ने चाणक्य से मेल किया और दोनों पुरुषों ने मिलकर म्लेच्छ राजा पर्वतक की सेना लेकर पाटलिपुत्र पर चढ़ाई की और नंदों को युद्ध में परास्त करके मार ‌‌‌ दिया गया था। हालांकि अब हमारे आदर्श चाणक्य नहीं रह गए हैं।अब इनका स्थान किसी ओर ने लेलिया है। खैर चतुराई का मतलब आप समझके नहीं । उम्मीद  करते हैं चतुराई का मतलब आप समझ चुके हैं।

‌‌‌मूर्ख का मतलब

अब मूर्ख का मतलब तो आप बहुत ही अच्छे तरीके से समझते ही होंगे ।मूर्ख का मतलब वह जो बेवकूफाना कार्य करता है। इस संबंध मे आपको एक कहानी बता देना उचित है। एक बार शैख चिल्ली अपने गधे के साथ कहीं पर जा रहा था तो वह गधे के पीछे पीछे चल रहा था । किसी ने उसे कहा कि मूर्ख है क्या गधे ‌‌‌पर चढ़कर चलना चाहिए तो शेख चिल्ली गधे पर चढ़ गया ।कुछ दूर गया तो किसी ने कहा कि गधे को वजन लग रहा है । इसलिए गधे पर चढ़कर चलना ठीक नहीं है। तो शेख चिल्ली ने गधे को अपने कंधे पर चढ़ाकर चलने लगा । जब कुछ दूरी पर गया तो  किसी ने कहा कि गधे को अपने सर पर क्यो बैठा रखा है मूर्ख हो क्या ?

‌‌‌अब शेख चिल्ली को आज तक समझ नहीं आया कि क्या गलत था और क्या सही था ?

असल मे मूर्खें का हाल भी यही होता है। वे बस सुनी सुनाई बातों पर काम करते हैं। उनके पास भेजा बहुत होता है लेकिन उसका इस्तेमाल करने की जहमत कभी नहीं उठाते हैं। बस भेजा पड़ा पड़ा जंग मारने लग जाता है।

‌‌‌चतुर और मूर्ख मे फर्क कहानी

‌‌‌प्राचीन काल की बात है । एक राज्य के अंदर सुखदेव नामक राजा राज्य करता था। वह राजा काफी गुणवान और ईमानदार था। काफी बुद्धिमान भी था। एक बार राजा के सभा के अंद राजा ने मंत्री से पूछा …….बताओ मंत्री मूर्ख इंसान और चतुर मे क्या फर्क होता है ?

……महाराज मूर्ख के पास दिमाग नहीं होता है और चतुर ‌‌‌खुद के दिमाग का इस्तेमाल करता है।

——- ‌‌‌चलो हम आपकी बात मान लेते हैं लेकिन क्या तुम सिद्ध कर सकते हो कि ऐसा सच मुच होता है ?

………हा महाराज मैं सिद्ध कर सकता हूं । लेकिन इसके लिए समय चाहिए होगा ?

……..ठीक बोलो कितना समय चाहिए ?

……….7 दिन ।

‌‌‌और इस प्रकार से राजा मंत्री को 7 दिन का समय देते हैं।जब 7 दिन बीत जाते हैं तो मंत्री राजा के पास आता है और उनको अपने पास लेकर जाता है। वे दूर एक पहाड़ों की तरफ जाते हैं। उसके बाद राजा कहते हैं ……..आप हमे यहां क्यों लेकर आएं हो ?

…….महाराज सब कुछ साफ हो जाएगा । ‌‌‌आप दूर उस मछली पकड़ने वाले को देखे जो समुद्र के अंदर मछली पकड़ रहा है।

राजा ने देखा तो एक मछुआरा है जो मछली को पकड़ रहा है। हालांकि उसके पास जाल है । लेकिन वह बस ऐसे ही पड़ा हुआ है। राजा उसके पास जाता है और बोलता है ………तुम इस जाल से मछली क्यों नहीं पकड़ते ।

……चलो जाल से पकड़ता हूं ‌‌‌और उसके बाद वह जाल से मछली पकड़ने का प्रयास करता है लेकिन उसे इसके अंदर सफलता नहीं मिलती है तो वह बोलता है ……मुझे एक एक मछली पकड़ना काफी पसंद है। मैं कई सालों से यही कर रहा हूं।

‌‌‌उसके बाद मंत्री उनको एक दूसरे मछुआरे के पास लेकर जाते हैं।तो राजा देखते हैं कि वह जाल से भर भर के मछली पकड़ता है और बात करने पर बताता है कि वह नई नई जगहों से मछली पकड़ता है। राजा सब कुछ समझ जाते हैं

‌‌‌वह भूर्ख ऐसा था जो ना तो कुछ समझने का तैयार था ना कुछ बदलने को बस ऐसे ही किस्मत का रोना रोता था। बात सिर्फ मूर्ख मछुआरे की नहीं है। आज भी बहुत से लोग हैं जो उस मूर्ख मछुआरे की तरह हैं। कुछ भी बदलना नहीं चाहते हैं। कुछ भी सीखना नहीं चाहते हैं लेकिन उनको अधिक से अधिक पैसा चाहिए होता है। ‌‌‌भले ही उनके पास पैसा हाशिल करने का टैलैंट ना हो लेकिन चाहिए होता है।इस कहानी का मकसद सिर्फ इतना है कि यदि आपको चतुर बनना है तो समय के साथ चलना होगा । यदि आप समय से पीछे हैं तो आपको मूर्ख कहा जाएगा ।

चतुर का विलोम शब्द, चतुर शब्द का विपरीतार्थक शब्द है, चतुर का उल्टा Chatur ka vilom shabd ‌‌‌अम्मीद करते हैं कि आपको यह लेख पसंद आया होगा ।यदि आपका कोई विचार है तो नीचे कमेंट करके बताएं ।

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