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man ka vilom shabd मन का विलोम शब्द ?

मन का विलोम शब्द, रोगी मन का विपरीतार्थक शब्द है, मन का उल्टा man ka vilom shabd

शब्द (word) विलोम (vilom)
मन ‌‌‌मन रहित या उदाहरण के लिए आत्मा
manAman

‌‌‌मन का विलोम शब्द और अर्थ

दोस्तों मन शब्द के बारे मे तो आप अच्छी तरह से परिचित है ही । क्योंकि मन के बिना आप भी नहीं होगें । या आपकी पहचान खत्म हो जाएगी । मन का विलोम शब्द होता है अमन या जो मन रहित हो या जिसके पास मन नहीं हो । उसके लिए अमन शब्द का प्रयोग किया जाता है।

‌‌‌अब मन की बात करें तो मन सूचनाओं का संग्रह है । ऐसी सूचनाएं जिनको आपने इस जीवन के अंदर एकत्रित की हैं। बस यदि सारी सूचनाओं को आप हटा देते हैं तो फिर आप और मैं जैसा कुछ नहीं समझ आएगा । मन उन सूचनाओं का संग्रह होता है जो आप जीवन मे करते हैं।

‌‌‌हिंदु धर्म के अंदर यह कहा जाता है कि इंसान को अच्छे कर्म करने चाहिए । मतलब यदि आप अपने अंदर अच्छी सूचनाएं भरेंगे तो वे आपको अच्छा फल देंगी और यदि आप खराब सूचनाएं भरेंगे तो वे आपको खराब फल प्रदान करेंगी ।

मन का विलोम शब्दमन का विलोम शब्द

‌‌‌इसलिए आप जहां तक हो सके अच्छी सूचनाओं को अपने अंदर भरें । मन वैसे ही होता है जैसे कि आपका  खेत होता है आप खेत के अंदर यदि कचरा बीज डालते हैं और उसके बाद आप यह उम्मीद करते हैं कि खेत से सोना निकलेगा तो आप गलत सोच रहे हैं। ‌‌‌यदि आप कचरा डालेंगे तो अंदर कचरा ही निकलेगा ।यदि आप बारिश के वक्त कुछ अच्छा बीज डालते हैं तो फिर आप अच्छा ही प्राप्त करेंगे ।

‌‌‌इसी तरह से आपका मन होता है। यदि आप अपने मन के अंदर अच्छी सूचनाएं भरते हैं तो आप अपने आप अच्छाई की तरफ चले जाएंगे। और यदि आप अपने मन के अंदर खराब सूचनाएं भरते हैं तो आप उसी दिशा के अंदर चले जाएंगे । आपका खराब मन सिर्फ दूसरों को ही परेशान नहीं करेगा । वरन वह आप खुद को भी सबसे अधिक परेशान

‌‌‌करेगा ।

इस संबंध मे एक दिलचस्प कथा मैं आपको बताता हूं ।एक गांव के अंदर एक बकरे काटने वाला रहता था। वह बकरे को रोजाना काटने का काम करता था। एक दिन उसका झगड़ा उसके पड़ोसी के साथ हो गया । और झगड़ा इतना बढ़ गया कि उस बकरे काटने वाले ने अपने पड़ोसी को बकरे की तरह काट डाला । ‌‌‌उस कसाई का कुछ नहीं हुआ । उसके बाद उस कसाई का झगड़ा एक दिन दूसरे पड़ोसी के साथ हो गया तो उसने दूसरे पड़ोसी को भी वैसे ही काट डाला ।

‌‌‌इसप्रकार से कुछ दिन बीत गए ।उस कसाई के 4 बेटे थे । एक दिन एक बेटे का झगड़ा अपने बाप के साथ हो गया । गुस्से मे आकर बेटे ने बाप को बाहर फिंकवा दिया । बाप को यह बुरा लगा और बाप ने बेटे को भी उसी तरह से काट डाला ।

‌‌‌इस कहानी को बताने का यही मतलब है कि जब आप अपने अंदर निर्दता भरोगे तो किसी मोड़ पर जाकर वह आप खुद को ही खत्म करने लग जाएगी । जहर निर्दता है  अब आप दूसरों को खिलाते खिलाते एक दिन खुद भी शिकार हो जाओगे । ‌‌‌आज अफगानिस्तान मे जो हो रहा है इसका कारण वे खुद हैं। सीरिया मे जो हुआ । इसका कारण भी वहां के ही लोग थे । इसमे कोई शक नहीं है। ‌‌‌इसलिए यह कहा गया है कि जैसी मति वैसी गति ।

‌‌‌अमन का मतलब और अर्थ

दोस्तों जहां पर अमन की बात आ जाती है।या जहां पर किसी भी प्रकार का कंपन नहीं हो जो कंपन से परे होता है । वह आत्मा होती है। हम लोग आत्मा को अनुभव कर सकते हैं। लेकिन यह सब करना आसान कार्य नहीं है।‌‌‌जब एक आत्मा की बात आ जाती है तो फिर बहुत से लोग इसको काल्पनिक मानने लग जाते हैं और उनको यह लगता है कि यह मनगढंत बाते हैं। पर ऐसा नहीं है। असल मे यह मनगढ़ंत बाते नहीं है। जिन चीजों को आप अनुभव नहीं कर सकते हैं वे मन गढंत बाते ही नहीं होती हैं।

‌‌‌दोस्तों आत्मा उर्जा का शुद्ध रूप होता है जिसके पास कोई मन नहीं है। जब सब कुछ समाप्त हो जाता है तो न समाप्त होने वाला एक तत्व आत्मा ही तो होता है। यदि आप आत्मा को जानना चाहते हैं तो आपको योग करना होगा बिना योग के आप आत्मा को कभी भी अच्छी तरह से नहीं जान सकते हैं।

‌‌‌भले ही माने या ना माने लेकिन योग करने की जो क्षमता है वह बहुत ही कम लोगों के अंदर बची है।क्योंकि योग करने मे काफी मेहनत लगती है। यदि आप उतनी मेहनत नहीं कर सकते हैं तो फिर योग भी कैसे कर सकते हैं।‌‌‌आज के इंसानों को बस बातें बनाना आता है। एक बाबाजी आराम से एसी के अंदर बैठे हुए उस इंसान की कमी गिना रहे थे जो ध्यान मे कई वर्ष गुजार चुका था। ऐसा लग रहा था कि बाबाजी तो महाज्ञानी हो गए ।लेकिन असल मे वे झूठा ज्ञान पेलकर जनता को बेवकूफ बना रहे थे ।

‌‌‌और भारत की जनता की एक समस्या यह है कि वह कभी भी खुद पढ़कर नहीं देखती है कि भगवत गीता क्या कहती है। उसको जो दूसरे बोलते हैं कुछ भी उसको सही मान लेती है और उसके बाद उसी के अनुसार सोच बना लेती है। यहां पर आप लोगों को धर्म के नाम पर आसानी से बरगाल सकते हैं।

‌‌‌कुल मिलाकर ऐसे गुरू चेले मन से पार तो नहीं जा सकते हैं लेकिन वे नरक के अंदर जरूर गिरते हैं। आत्मा आपकी है। आप आत्मा हैं आप और आत्मा अलग नहीं है। लेकिन आपको आत्मा मे स्थिति होना पड़ेगा । तभी कुछ सही हो सकता है।

‌‌‌यदि आप आत्मा मे स्थिति नहीं होते हैं तो फिर यह जन्म और मरण का चक्र लगा रहेगा कोई भी कुछ नहीं कर पाएगा । और जब तक आप खुद प्रयास नहीं करेंगे। आपको खुद को प्रयास करना होगा ।

‌‌‌यदि हम अपनी वासनाओं के वेग के सामने खुद को खड़ा रख पाए तो फिर दुनिया की कोई भी ताकत हमे यहां पर जन्म लेने के लिए विवश नहीं कर सकती है। इसमे कोई भी शक नहीं है।‌‌‌लेकिन वासनाओं के सामने खुद को खड़ा रखना इतना आसान कार्य नहीं है। इसके लिए आपको बहुत कुछ करना होगा ।

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