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‌‌‌स्नेह का पर्यायवाची शब्द या स्नेह का समानार्थी शब्द

‌‌‌स्नेह का पर्यायवाची शब्द या स्नेह का समानार्थी शब्द (‌‌‌sneh ka paryayvachi shabd / sneh ka samanarthi shabd) के बारे में आपको यहां पर पढने को मिलने वाला है । इसके साथ ही स्नेह से जुड़ी विभिन्न तरह की जानकारी हासिल होगी । तो लेख देखे ।

‌‌‌स्नेह का पर्यायवाची शब्द या स्नेह का समानार्थी शब्द (‌‌‌sneh ka paryayvachi shabd / sneh ka samanarthi shabd)

शब्द (shabd)पर्यायवाची शब्द या समानार्थी शब्द (paryayvachi shabd / samanarthi shabd)
‌‌‌स्नेहप्यार, प्रीति, दुलारा, इश्क, प्रेम, मोहब्बत, प्रणय योग्य, अनुराग, प्रणय, चाह, कामा, प्रीतिकर, स्नेहभाजन, अति आकर्षक ।
‌‌‌स्नेह in Hindipyaar, preeti, dulaara, ishk, prem, mohabbat, pranay yogy, anuraag,  pranay, chaah,kaama, preetikar, snehabhaajan,ati aakarshak .
‌‌‌स्नेह in Englishlove, affection, fondness, attachment, endearment.
‌‌‌स्नेह का पर्यायवाची शब्द या स्नेह का समानार्थी शब्द‌‌‌स्नेह का पर्यायवाची शब्द या स्नेह का समानार्थी शब्द

‌‌‌स्नेह का अर्थ हिंदी में || ‌‌‌sneh ka arth Hindi mein

दोस्तो स्नेह का अर्थ होता है प्रेम भाव होना । जब मानव का किसी दूसरे के साथ प्रेम भाव होता है तो इसे स्नेह कहा जाता है । जैसे की आप किसी कन्या से प्रेम करते है या मुहब्बत करते है तो यह स्नेह होता है । वही पर आपकी मां का आपके प्रति प्रेम भाव है यह आपको मालूम है तो ‌‌‌इसे भी स्नेह कहा जाता है । स्नेह होने का दूसरा मतलब आकर्षक होता है । जिस वस्तु व्यक्ति की और मानव आकृषित होता है वह भी स्नेह होता है ।

‌‌‌मुहब्बत शब्द के बारे में आज के युवा लोगो को बताने की जरूरत नही है । यह भी स्नेह होता है । तो इस तरह से कहा जा सकता है की स्नेह का अनेक तरह का मतलब हो सकते है जो है –

  • किसी के प्रति प्रेम भाव होना यानि प्रेम।
  • किसी से प्यार या प्रेम करना यानि प्यार ।
  • किसी से मुहब्बत होना ।
  • प्यार होना ‌‌‌यानि प्रिति ।
  • मां का अपने बच्चो के प्रति दुलार होना यानि दुलारा ।
  • आज के युवा लोगो के लिए वह शब्द जिसे प्रेम के रूप में जाना जाता है यानि इश्क ।
  • जिसे मोहब्बत के नाम से जाना जाता है ।
  • वह जो अपने प्राण से भी महत्वपूर्ण हो जाता है यानि प्रणय योग्य ।
  • किसी तरह के प्रेम या भक्ति ‌‌‌का अनुराग होना यानि अनुराग ।
  • किसी तरह की चाह होना ।
  • जिसकी और अधिक से अधिक आकर्षत होते है यानि अतिआकर्षक ।

‌‌‌स्नेह शब्द का वाक्य में प्रयोग || ‌‌‌sneh shabd ka vaaky mein prayog

  • राम को सिताजी से काफी अधिक स्नेह था ।
  • आज कल के युवा लोग शहर जाते नही है और स्नेह कर बैठते है ।
  • यह उम्र वही है जिसमें अधिकतर लोग स्नेह कर कर अपने जीवन को खराब कर लेते है ।
  • मैं अपने जीवन को सफल बनाउगा किसी कन्या से स्नेह कर कर जीवन खराब नही करने वाला ।

‌‌‌स्नेह के पर्यायवाची शब्दो का वाक्य में प्रयोग

  • भगवान हनुमानजी राम का अनुराग काफी अधिक करते है ।
  • एक मां के लिए उसकी सभी संतान एक समान होती है और वह सभी को एक समान प्यार करती है ।
  • जब से मैंने आपको देखा है आपसे मोहब्बत हो गई है ।
  • राहुल को किताबो से बहुत अधिक प्रेम है तभी वे दिन रात ‌‌‌किताबो को पढ़ते रहता है ।

स्नेह क्या होता है विस्तार से समझाए

दोस्तो स्नहे का मतलब होता है प्रेम भाव होना । अक्सर लोग प्रेम भाव का मतलब गलत निकाल लेते है । क्योकी प्रेम भाव का मतलब किसी लड़के और लड़की के बिच में होने वाले प्यार को ही नही कहते है । बल्की एक मां का अपने बेटे के प्रति ‌‌‌जो प्यार होता है, एक बेटे का अपनी बहन से जो प्रेम होता है, एक भग्त का अपने ईश्वर से अनुराग होता है यह सभी प्रेम भाव होता है और इन सभी को स्नेह कहा जाता है ।

स्नेह का मतलब होता है लगाव होना । जैसे की एक बेटे का अपनी मां के साथ काफी अधिक लगाव होता है तो यह स्नेह होता है । ‌‌‌इस संसार में बहुत कुछ है जो की प्रेम के योग्य है । और उन सभी को स्नेह कहा जा सकता है । आपने देखा होगा की श्री राम का भग्त हनुमान था जो की श्री राम से काफी अधिक प्रेम करता था । या ऐसा कहे की अनुराग करता था । वह जब भी देखने को मिलता था तो राम राम नाम जपता हुआ देखा जाता था । तो इसका मतलब यह है ‌‌‌की वह अपने प्रभु राम से अनुराग करता था और अनुराग करने को स्नेह कहा जाता है ।

क्योकी आपको पता है की एक भग्त का अपने भगवान के साथ काफी स्नेह होता है । भग्ति में स्नेह का मतलब हम अनेक तरह से दे सकते है । जैसे की पहलाद भग्त था जो की विष्णु का नाम इस तरह से जपता था की अपने प्राणो की फिकर तक ‌‌‌नही करता था । तो यह सब स्नेह होता है ।

स्नेह का मतलब होता है प्रेम भाव होना या मुहोब्बत होना । और जीस किसी व्यक्ति या जीव जंतु के साथ प्रेम भाव होता है उसे स्नेह कहा जाता है ।

जानवरो के बिच में भी स्नेह होता है । ‌‌‌क्योकी जीस तरह से इंसान एक दूसरे से प्रेम करते है ठिक वैसे ही जानवरो में होता है । आपने देखा होगा की एक बंदर अपने बच्चे से काफी प्रेम करता है तो यह स्नेह होता है । और इसी तरह से दूसरे बंदर भी आपस में स्नेह रखते है ।

‌‌‌स्नेह को अनेक रूपो में परिभाषित किया जा सकता है । क्योकी स्नेह एक तरह का नही होता है । बल्की जानवरो से लेकर इंसानो तक किसी भी पीढी के बिच में स्नेह हो सकता है । ‌‌‌

स्नेह कितने प्रकार के होते है –

दोस्तो वैसे तो स्नेह के कोई प्रकार नही होते है। क्योकी स्नेह के प्रकार अभी तक बताए ही नही गए है । मगर हम आपको यहां पर मानव के द्वारा अलग अलग जगहो पर किया जाने वाले स्नेह के आधार पर इसके प्रकार को समझा सकते है । हालाकी यह प्रकार नही होते है बल्की मानव अलग ‌‌‌अलग जगहो पर स्नेह करता है । जैसे –

1. जानवरो के बिच में स्नेह होना

दोस्तो यह एक उत्तम उदहाण होता है क्योकी जानवरो के बिच में जो स्नेह होता है वह शायद ही मानव में देखने को मिलता होगा । जानवर एक दूसरे से काफी अधिक स्नेह करते है । हालाकी जब दूसरी प्रजाति होती है तो यह स्नेह नही देखना ‌‌‌नही पड़ता है । जैसे की कुता ओर बिल्ली के बिच में स्नेह नही होता है । क्योकी यह एक खाद्य श्रृखला कें अंदर आ जाते है ।

तो इन दोनो के बिच में स्नेह नही होता है । हालाकी बिल्ली अन्य बिल्लियो के साथ स्नेह करती है । ओर इसी तरह से कुत्ते भी अन्य कुत्तो के साथ स्नेह करते है ।

‌‌‌इस तरह से जानवर केवल अपनी ही पीढी के जानवरो के साथ स्नेह नही रखते है बल्की आपने देखा होगा तो आपको पता होगा की जानवरो मानव से भी स्नेह करते है । इसका सबसे अच्छा उदहारण कुत्ते को मान सकते है । क्योकी कुत्ता मानव से जिस तरह से स्नेह करता है शायद ही दूसरा जानवर करता होगा । वह अपने मालिक से ‌‌‌इतना अधिक स्नेह करता है की अपने प्राणो को नष्ट तक कर देता है । और इसके बारे में आपको पता है ।

2. मानव के बिच में स्नेह

दोस्तो आपने देखा होगा की मानव हमेशा से ही मानव को अधिक अच्छा समझता है । वह अन्य जीव जंतुओ की तुलना में मानव को बुद्धिमान मानता है । और आपने देखा होगा की आपके आस पड़ोस मे ‌‌‌रहने वाले लोग आपकी फिकर करते है । आपको चाहते है और आपकी दुखो में मदद भी करते है । यहां तक की आपके हाल चाल के बारे में सब कुछ जानकारी रखते है । जब आपको किसी तरह के कष्ट में देखा जाता है तो वे आपकी मदद भी कर देते है तो यह एक तरह का स्नेह होता है ।

‌‌‌उसी तरह से एक एक पुरूष या महिला अपने दोस्तो से स्नेह करता या करती है । और उसी तरह से वह अपने देश के लोगो से भी स्नेह करते है । यहां तक की विदेशी लोगो से भी स्नेह करते हैं । जैसे की आपने देखा होगा की अभी आज हमारे देश भारत में विदेशी लोगो मे से कुछ ऐसे लोग है जिसे बच्चा बच्चा जानता है । ‌‌‌और सभी चाहते है की वे उनसे एक बार जीवन में मिले । इस तरह के लोग प्रसिद्ध लोग होते है । तो यह भी स्नेह होता है ।

‌‌‌एक मां अपने बेटे से ओर एक बेटा अपनी मां से जो प्रेम करता है वह भी स्नेह होता है । इसी तरह से आपने देखा होगा की परिवार के अलावा भी जो रिश्तेदार होते है वे सभी एक दूसरे से प्रेम करते है और सभी तरह के सुख दूख में साथ देते है तो यह भी स्नेह होता है ।

‌‌‌3. मानव का ईश्वर के प्रति स्नेह

दोस्तो मानव हमेशा से ही अपने ईश्वर को महत्व देता है । दोस्तो भग्ति का जब भी नाम आता है तो ऐसे अनेक तरह के भग्त होते है जिनका नाम पहले आता है । जैसे की पहलाद भग्त, मीरा, रावण, हनुमान, नारद आदी सभी ऐसे भग्त है जो की अपने ईश्वर से प्रेम करते है । हालाकी अब ‌‌‌कुछ लोग कहेगे की बाकी सब तो ठिक है मगर रावण का नाम यहां पर क्यो लिया गया है ।

 तो आपको बता दे की रावण जैसा ताक्तवर कोई नही था वह काफी अधिक ज्ञानी व्यक्ति था । और यही कारण है की जब उनका वध हुआ तो लक्ष्मण ने रावण से ज्ञान हासिल किया था ।

‌‌‌इसके साथ ही रावण शिव का प्रम भग्त था । और वह शिव के जीतना प्रेम किसी भी ईश्वर से नही करता था । क्योकी उसे यह भी मालूम था की शिव अगर चाहे तो उसे एक पल मे नष्ट कर सकते है और शिव की ताक्तो से रावण अनजान नही था । इसके साथ हीरावण ने कई वर्षों तक शिव के लिए तप भी किया था । ‌‌‌इस बारे में आपने सुना होगा ।

इसके साथ ही शिव के द्वारा भी कहा गया है की रावण उनका प्रम भग्त है । तो इस कारण से हम कह सकते है की रावण का भी शिव के प्रति स्नेह था ।

और इसी तरह से जो लोग भग्ति करते है उनका अपने ईश्वर के प्रति स्नेह होता है ।

‌‌‌इस तरह से हमने स्नेह के पर्यायवाची शब्द या स्नेह का समानार्थी शब्द के बारे में जान लिया है । अगर आपको कुछ पूछना है तो कमेंट बॉक्स आपके प्रशन के इंतजार में है ।

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